Wednesday, December 25, 2013

स्वराज कहु या ताजपोशी
सवाल अभी बुझा  नहीं हैं -

पथ पे रोशनी आयी हैं
अँधेरा  मगर मरा नहीं हैं

कलयुग कि एक कहानी हैं
हजार व्यथाऐ  हर रोज पनपते हैं

व्यथाओ पे उम्मीद का दिया जलाये रखना
छोटा ही सही सच्चे कदम बढ़ाए चलना ।

                                           - अमर

Saturday, November 9, 2013

अभी अभी आँखों से

अभी अभी आँखों से
    गुजरा हैं एक ख्वाब ।
अभी अभी दिल को
   हुआ हैं उससे प्यार ।

 कितनी सुंदर हैं वो काया
 परीयों सी उसकी हैं माया
वाह ख़ुदा , किया खूब हैं उसे बनाया ।
 गुजरे वो सामने से
 खुली आँखों मैं न समाती हैं
बंद कर लू आँखें
वह ख्वाब बन जाती हैं ।

अभी अभी आँखों से
    गुजरा हैं एक ख्वाब ।
अभी अभी दिल को
   हुआ हैं उससे प्यार ।

पतों  की सरसराहट
बूँदो की   हलचल
वाह ख़ुदा ,  हवाओं का रुख भी गया हैं बदल ।

जिधर  से गुजरती हैं वह
मौसम भी हो जाता हैं चंचल
 बागों में  बस उसकी ही महक
चारो ओर खवाबों की लहर ।

अभी अभी आँखों से
    गुजरा हैं एक ख्वाब ।
अभी अभी दिल को
   हुआ हैं उससे प्यार ।





Saturday, August 10, 2013

एक सवाल

एक सवाल ने  संभाला हैं  मुझे
कितना  सच्चा, कितना गहरा
दिल से  था   पूछा    तुमने -
छोटी छोटी बातों में रह जाओगे
सपनों कि मंजिल कब पाओगे ?

गिले   शिकवों से था जो   दिल भारी भारी
तोड़ चला हु  उनको  अब  मैं    बारी बारी ।
 दर्द भी दिए थे जिसने
गले मिल उनसे भी
बस चलता रहता हु अब
बस मंजिल   ही   हैं सब ।
                              अमर 


Friday, June 28, 2013

रात की बात

रात   की  बात  थी
बात की   रात   थी
जो  भी  कहो  तुम  
भूल न पायेंगे हम ।

प्यार  हैं  ,प्यार को नाम न दो तो किया
प्यार   तो   प्यार   ही   रहेगा       सदा ।

जमाना       से       डरते         हो
 ओ             मेरी               जाना
 प्यार लेकिन जिंदा रखना पिया

जमाना  न  देखेगा  दिल हमारा
दिल  में  रखना   तस्वीर  हमारी
याद   आएगी    उम्र   भर    मेरी   ।
*
पल    की  बात  थी
ख्वाब का हाथ   था
जो  भी  कहो  तुम  
भूल न पायेंगे हम ।


ख्वाब था , ख्वाब को नाम न दो तो किया
पल  वो   तो  जिन्दा   ही   रहेगा      सदा ।


बन्धनों     में       बंधी      हो
ओ          मेरी              जाना
यकीन    रखना लेकिन पिया
 बाँहों मेरी  खुली  रहेगी   सदा
ज़माने का डर ,मिट जाये जब
आ    जाना    बांहों   मैं    मेरी ।
 
रात   की  बात  थी
बात की   रात   थी
जो  भी  कहो  तुम
भूल न पायेंगे हम ।

Saturday, June 22, 2013

बिन मौसम कि बरसात



बिन मौसम कि बरसात
आ थामा तुमने हाथ ।
आँखों में था गुस्सा
बन बैठा हैं प्यार ।

ओ रबा ! बेसबर क्यों किया हैं इतना ।

बरसो  खेले हम आँख मिचोली -
आँखों से जितने दूर जाते थे तुम
दिल के उतने करीब आते थे तुम ।
ये गुस्सा , ये नखरा था इंतज़ार जताना ।

ओ रबा ! बेसबर क्यों किया हैं इतना ।


बिन मौसम कि बरसात
आ थामा तुमने हाथ ।
आँखों में था गुस्सा
बन बैठा हैं प्यार ।

ओ रबा ! बेसबर क्यों किया हैं इतना ।

आँखों का था आँखों से   मिलना बस  
बह जाउंगी अब -
संग तेरे जाने कितनी दूर ।
ज़माने का डर
संग तेरे जाउंगी अब भूल ।

ओ रबा ! बेसबर क्यों किया हैं इतना ।

बिन मौसम कि बरसात
आ थामा तुमने हाथ ।
आँखों में था गुस्सा
बन बैठा हैं प्यार ।

ओ रबा ! बेसबर क्यों किया हैं इतना ।

Sunday, June 9, 2013

दो दिल , दो मंजिल

  
दो दिल मिल जाये , मुमकिन हैं
 हो चाहत जितनी , प्यार मिले उतना
अक्सर ऐसा होता नहीं हैं ।
 थोड़ा सा ज्यादा , थोड़ा सा कम -
प्यार कभी बस पुरा  होता नहीं हैं ।

दो मंजिल मिल जाये , मुमकिन हैं
राहें हो एक और साथ चले हरदम
अक्सर ऐसा होता नहीं हैं ।
थोड़ा सा आगे , थोडा सा पीछे -
साथ हो बस सीधा होता नहीं हैं ।
                                    - अमर



Saturday, April 13, 2013

ये रात एक गज़ल सी

चाँद छुप  जा बैठा आज , छत पे जो निकले हो तुम
खिल रही हैं तेरी चाँदनी ,  छा रहे हो  तुम
ये रात एक  गज़ल  सी ,   गा रहे हो  तुम ।

हजारों   इश्क   वाले   हो  रहे हैं पैदा आज
बालो की सफेदी क्या , दिल हो रहे हैं  ज़वा आज
मदहोश सब , होश में  लाने कि हर कोशिश  नाकाम |

चाँद छुप  जा बैठा आज , छत पे जो निकले हो तुम
खिल रही हैं तेरी चाँदनी ,  छा रहे हो  तुम
ये रात एक  गज़ल  सी ,   गा रहे हो  तुम ।

कोई हैं रहा हैं तेरी खूबसूरती का कायल 
कोई हो रहा हैं तेरी आवाज में  मशगूल
चर्चा बस तेरी , हर जुबान हैं बेलगाम

चाँद छुप  जा बैठा आज , छत पे जो निकले हो तुम
खिल रही हैं तेरी चाँदनी ,  छा रहे हो  तुम
ये रात एक  गज़ल  सी ,   गा रहे हो  तुम ।

                                    - अमर 



Tuesday, March 26, 2013

होली के रंग

बारिस का पानी , पानी   में    तुम
ख्वाबों  की    बूंदे ,  बन बरसे हम ।

हवा      का झोंका ,   झोंके  में     तुम
मस्ती का   आलम , बन बहते हम ।

होली   के     रंग ,  रंगों   में     तुम
प्यार की  मिट्टी , बन लगते हम ।

Sunday, March 24, 2013

तेरे किताब का एक पन्ना


तेरे किताब का एक पन्ना
उड़   आया   मेरे     अंगना
जाना कितनी मोहब्त करते हो साजना  ।


हो न जाये इजहारे मोहब्त , प्यार  छुपाये रखा
बरसो  तक निगाहे ओ जुबां को दबाये रखा ।

खुदा   भी न देख सका अपनी बेबसी
मिटा  दी  पल  भर  में    सारी दूरी  ।

जो काम न कर सके कई मुलाकाते
हवा के  एक झोंका ने कर  दिखाये ।

तेरे किताब का एक पन्ना
उड़   आया   मेरे     अंगना
जाना, कितनी मोहब्त करते हो साजना  ।

 शब्दों में  पिरोये  होंगे   प्यार      को
 शायद ही इतनी खूबसूरती से कोई ।

मैं पढ़ता  चला गया , खोता चला गया
तेरे ख्याल का कायल होता चला गया । 

अफ़सोस क्यों छुपाये रखा  था आपना प्यार
टूटे  जायेगा अब हमारा  सारा  इंतज़ार  ।

तेरे किताब का एक पन्ना
उड़   आया   मेरे     अंगना
जाना, कितनी मोहब्त करते हो साजना  ।

Friday, March 15, 2013

पिया बन बैठे

पिया    बन बैठे ,    प्यार जानते नही
तकरार कर बैठे , मनाऊ मानते नहीं ।

दुल्हन     बनाने      से        पहले
किये  थे   वादे   कितने      सारे
लगता था , ला दोगे चाँद  सितारे ।

वादे    तो  वादे    ही   रह       गये
हर   छोटी  बातों    में    लड़ते   हो ।

पिया    बन बैठे ,    प्यार जानते नहीं 
तकरार कर बैठे ,   मनाऊ मानते नहीं ।

दुल्हन     बनने      से        पहले
देखे   थे   खाव्ब    कितने    सारे 
सोचा था घर हो समुंदर  किनारे  ।
 

समुंदर तो सपने में  ही रह गये
एक नदी भी न दिखा पाए हो ।

पिया    बन बैठे ,    प्यार जानते नही
तकरार कर बैठे ,  मनाऊ मानते नहीं ।

                                       - अमर 

Sunday, January 27, 2013

एक था हाथी     नाम था उसका मोटू    ।
एक थी चींटी     नाम था उसका छोटू    ।
एक था कुत्ता   नाम था उसका लम्बू   ।
एक थी बिल्ली नाम था उसका पतलू  ।

 मोटू ,   छोटू ,     लम्बू,     पतलू      चारों   चले     बाज़ार   रे ।
बाज़ार    में      चारो     ने ,जम    के   खाये    लडू  हज़ार  रे ।

हु हु हु हा हा हा रे ।

दुकानदार   ने   बिल    दे ,  बोला   करना    न    इनकार   रे ।
छोटू , लम्बू,  पतलू तीनो जोरे पैसे बोले ये लो हज़ार रे ।

हु हु हु हा हा हा रे ।


इतने में  मोटू   डगमगाया , जोर  से  छिका तीन बार रे   ।
छोटू , लम्बू,   पतलू    तीनो   जा   पहुंचे   दूसरे  बाज़ार   रे   ।

हु हु हु हा हा हा रे ।


दुकानदार गुस्साया बोले मोटू निकाल मेरे पैसे प्यार से ।
मोटू   हाथी   दुम  दबा     भागा   बोल  मैं    तो  कंगाल   रे  ।
हु हु हु हा हा हा रे ।

                                               - अमर




Saturday, January 19, 2013

वजूद


तेरे ख्वाबों में कई सुराख हो गए थे -
झाँक के देखा तो एक जिंदगी नज़र आई
जलती रही थी जो रिश्ते के अलाव पे बरसो से  ।

मेरे वजूद का बस्ता कमरे के एक कोने में पड़े थे
मैं जाने कब की खो गयी,
बस तुम ही तुम रह गए थे ।

तेरे सपनो के बादल ने दी थी
मुझको तिरागी कि पोशाक
पहन उसे समझोतों संग हो चली थी ।

बरसो बाद आज तेरी सपने टूटने लगे
मंजिल का भी ठिकाना न रहा
देख मेरी ओर लगायी तुमने उम्मीद कि आस ।

थमा हैं तेरा हाथ या दी अपनी  सांसो को नयी हवा
सवाल दिल पूछता रहेगा
पर जाने क्यों  बाहर कि धूप अच्छी लगी  ।
  - अमर