Sunday, September 28, 2014


ऐ ज़िंदगी , मुड़ के देख ले एक बार जरा 
बरसों के गीले शिकवे पल में दूर हो जायेंगे !
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फुरसत के ख्याल दिल में भरने लगी हें आहें 
पैबंद लग जा आँखों में , वक़्त थम जा तू जरा !
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झूठी हँसी  होंठो  पे , कुतरे  हुए  शब्द  जुबां     पे 
यकीन मान , शुकून मिला खुद को देख आईने में !
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आज शाम खोल रखा हैं घर के सारे दरवाजे 
बिन दस्तक आ जाना , पलटने हैं पुराने कई पन्ने !
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Sunday, August 17, 2014

 जुल्फ गिरी ,  जुल्म हुआ
हाय राम जाने
किया किया हुआ

एक रोग आ लगा
लोगों ने कहा
इश्क़ हो गया


नींदे पुछे , कब आऊ
दिल बोले बस
उसका ख़्वाब लाओ
मत रख महरूम
अपने दीदार से
खुली आँखे ही
न सो जाऊ

जुल्फ गिरी , जुल्म हुआ
हाय राम जाने
 किया किया हुआ