Sunday, March 24, 2013

तेरे किताब का एक पन्ना


तेरे किताब का एक पन्ना
उड़   आया   मेरे     अंगना
जाना कितनी मोहब्त करते हो साजना  ।


हो न जाये इजहारे मोहब्त , प्यार  छुपाये रखा
बरसो  तक निगाहे ओ जुबां को दबाये रखा ।

खुदा   भी न देख सका अपनी बेबसी
मिटा  दी  पल  भर  में    सारी दूरी  ।

जो काम न कर सके कई मुलाकाते
हवा के  एक झोंका ने कर  दिखाये ।

तेरे किताब का एक पन्ना
उड़   आया   मेरे     अंगना
जाना, कितनी मोहब्त करते हो साजना  ।

 शब्दों में  पिरोये  होंगे   प्यार      को
 शायद ही इतनी खूबसूरती से कोई ।

मैं पढ़ता  चला गया , खोता चला गया
तेरे ख्याल का कायल होता चला गया । 

अफ़सोस क्यों छुपाये रखा  था आपना प्यार
टूटे  जायेगा अब हमारा  सारा  इंतज़ार  ।

तेरे किताब का एक पन्ना
उड़   आया   मेरे     अंगना
जाना, कितनी मोहब्त करते हो साजना  ।

No comments: