Saturday, August 10, 2013

एक सवाल

एक सवाल ने  संभाला हैं  मुझे
कितना  सच्चा, कितना गहरा
दिल से  था   पूछा    तुमने -
छोटी छोटी बातों में रह जाओगे
सपनों कि मंजिल कब पाओगे ?

गिले   शिकवों से था जो   दिल भारी भारी
तोड़ चला हु  उनको  अब  मैं    बारी बारी ।
 दर्द भी दिए थे जिसने
गले मिल उनसे भी
बस चलता रहता हु अब
बस मंजिल   ही   हैं सब ।
                              अमर 


Friday, June 28, 2013

रात की बात

रात   की  बात  थी
बात की   रात   थी
जो  भी  कहो  तुम  
भूल न पायेंगे हम ।

प्यार  हैं  ,प्यार को नाम न दो तो किया
प्यार   तो   प्यार   ही   रहेगा       सदा ।

जमाना       से       डरते         हो
 ओ             मेरी               जाना
 प्यार लेकिन जिंदा रखना पिया

जमाना  न  देखेगा  दिल हमारा
दिल  में  रखना   तस्वीर  हमारी
याद   आएगी    उम्र   भर    मेरी   ।
*
पल    की  बात  थी
ख्वाब का हाथ   था
जो  भी  कहो  तुम  
भूल न पायेंगे हम ।


ख्वाब था , ख्वाब को नाम न दो तो किया
पल  वो   तो  जिन्दा   ही   रहेगा      सदा ।


बन्धनों     में       बंधी      हो
ओ          मेरी              जाना
यकीन    रखना लेकिन पिया
 बाँहों मेरी  खुली  रहेगी   सदा
ज़माने का डर ,मिट जाये जब
आ    जाना    बांहों   मैं    मेरी ।
 
रात   की  बात  थी
बात की   रात   थी
जो  भी  कहो  तुम
भूल न पायेंगे हम ।

Saturday, June 22, 2013

बिन मौसम कि बरसात



बिन मौसम कि बरसात
आ थामा तुमने हाथ ।
आँखों में था गुस्सा
बन बैठा हैं प्यार ।

ओ रबा ! बेसबर क्यों किया हैं इतना ।

बरसो  खेले हम आँख मिचोली -
आँखों से जितने दूर जाते थे तुम
दिल के उतने करीब आते थे तुम ।
ये गुस्सा , ये नखरा था इंतज़ार जताना ।

ओ रबा ! बेसबर क्यों किया हैं इतना ।


बिन मौसम कि बरसात
आ थामा तुमने हाथ ।
आँखों में था गुस्सा
बन बैठा हैं प्यार ।

ओ रबा ! बेसबर क्यों किया हैं इतना ।

आँखों का था आँखों से   मिलना बस  
बह जाउंगी अब -
संग तेरे जाने कितनी दूर ।
ज़माने का डर
संग तेरे जाउंगी अब भूल ।

ओ रबा ! बेसबर क्यों किया हैं इतना ।

बिन मौसम कि बरसात
आ थामा तुमने हाथ ।
आँखों में था गुस्सा
बन बैठा हैं प्यार ।

ओ रबा ! बेसबर क्यों किया हैं इतना ।

Sunday, June 9, 2013

दो दिल , दो मंजिल

  
दो दिल मिल जाये , मुमकिन हैं
 हो चाहत जितनी , प्यार मिले उतना
अक्सर ऐसा होता नहीं हैं ।
 थोड़ा सा ज्यादा , थोड़ा सा कम -
प्यार कभी बस पुरा  होता नहीं हैं ।

दो मंजिल मिल जाये , मुमकिन हैं
राहें हो एक और साथ चले हरदम
अक्सर ऐसा होता नहीं हैं ।
थोड़ा सा आगे , थोडा सा पीछे -
साथ हो बस सीधा होता नहीं हैं ।
                                    - अमर



Saturday, April 13, 2013

ये रात एक गज़ल सी

चाँद छुप  जा बैठा आज , छत पे जो निकले हो तुम
खिल रही हैं तेरी चाँदनी ,  छा रहे हो  तुम
ये रात एक  गज़ल  सी ,   गा रहे हो  तुम ।

हजारों   इश्क   वाले   हो  रहे हैं पैदा आज
बालो की सफेदी क्या , दिल हो रहे हैं  ज़वा आज
मदहोश सब , होश में  लाने कि हर कोशिश  नाकाम |

चाँद छुप  जा बैठा आज , छत पे जो निकले हो तुम
खिल रही हैं तेरी चाँदनी ,  छा रहे हो  तुम
ये रात एक  गज़ल  सी ,   गा रहे हो  तुम ।

कोई हैं रहा हैं तेरी खूबसूरती का कायल 
कोई हो रहा हैं तेरी आवाज में  मशगूल
चर्चा बस तेरी , हर जुबान हैं बेलगाम

चाँद छुप  जा बैठा आज , छत पे जो निकले हो तुम
खिल रही हैं तेरी चाँदनी ,  छा रहे हो  तुम
ये रात एक  गज़ल  सी ,   गा रहे हो  तुम ।

                                    - अमर 



Tuesday, March 26, 2013

होली के रंग

बारिस का पानी , पानी   में    तुम
ख्वाबों  की    बूंदे ,  बन बरसे हम ।

हवा      का झोंका ,   झोंके  में     तुम
मस्ती का   आलम , बन बहते हम ।

होली   के     रंग ,  रंगों   में     तुम
प्यार की  मिट्टी , बन लगते हम ।

Sunday, March 24, 2013

तेरे किताब का एक पन्ना


तेरे किताब का एक पन्ना
उड़   आया   मेरे     अंगना
जाना कितनी मोहब्त करते हो साजना  ।


हो न जाये इजहारे मोहब्त , प्यार  छुपाये रखा
बरसो  तक निगाहे ओ जुबां को दबाये रखा ।

खुदा   भी न देख सका अपनी बेबसी
मिटा  दी  पल  भर  में    सारी दूरी  ।

जो काम न कर सके कई मुलाकाते
हवा के  एक झोंका ने कर  दिखाये ।

तेरे किताब का एक पन्ना
उड़   आया   मेरे     अंगना
जाना, कितनी मोहब्त करते हो साजना  ।

 शब्दों में  पिरोये  होंगे   प्यार      को
 शायद ही इतनी खूबसूरती से कोई ।

मैं पढ़ता  चला गया , खोता चला गया
तेरे ख्याल का कायल होता चला गया । 

अफ़सोस क्यों छुपाये रखा  था आपना प्यार
टूटे  जायेगा अब हमारा  सारा  इंतज़ार  ।

तेरे किताब का एक पन्ना
उड़   आया   मेरे     अंगना
जाना, कितनी मोहब्त करते हो साजना  ।