Sunday, September 28, 2014


ऐ ज़िंदगी , मुड़ के देख ले एक बार जरा 
बरसों के गीले शिकवे पल में दूर हो जायेंगे !
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फुरसत के ख्याल दिल में भरने लगी हें आहें 
पैबंद लग जा आँखों में , वक़्त थम जा तू जरा !
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झूठी हँसी  होंठो  पे , कुतरे  हुए  शब्द  जुबां     पे 
यकीन मान , शुकून मिला खुद को देख आईने में !
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आज शाम खोल रखा हैं घर के सारे दरवाजे 
बिन दस्तक आ जाना , पलटने हैं पुराने कई पन्ने !
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Sunday, August 17, 2014

 जुल्फ गिरी ,  जुल्म हुआ
हाय राम जाने
किया किया हुआ

एक रोग आ लगा
लोगों ने कहा
इश्क़ हो गया


नींदे पुछे , कब आऊ
दिल बोले बस
उसका ख़्वाब लाओ
मत रख महरूम
अपने दीदार से
खुली आँखे ही
न सो जाऊ

जुल्फ गिरी , जुल्म हुआ
हाय राम जाने
 किया किया हुआ

Wednesday, December 25, 2013

स्वराज कहु या ताजपोशी
सवाल अभी बुझा  नहीं हैं -

पथ पे रोशनी आयी हैं
अँधेरा  मगर मरा नहीं हैं

कलयुग कि एक कहानी हैं
हजार व्यथाऐ  हर रोज पनपते हैं

व्यथाओ पे उम्मीद का दिया जलाये रखना
छोटा ही सही सच्चे कदम बढ़ाए चलना ।

                                           - अमर

Saturday, November 9, 2013

अभी अभी आँखों से

अभी अभी आँखों से
    गुजरा हैं एक ख्वाब ।
अभी अभी दिल को
   हुआ हैं उससे प्यार ।

 कितनी सुंदर हैं वो काया
 परीयों सी उसकी हैं माया
वाह ख़ुदा , किया खूब हैं उसे बनाया ।
 गुजरे वो सामने से
 खुली आँखों मैं न समाती हैं
बंद कर लू आँखें
वह ख्वाब बन जाती हैं ।

अभी अभी आँखों से
    गुजरा हैं एक ख्वाब ।
अभी अभी दिल को
   हुआ हैं उससे प्यार ।

पतों  की सरसराहट
बूँदो की   हलचल
वाह ख़ुदा ,  हवाओं का रुख भी गया हैं बदल ।

जिधर  से गुजरती हैं वह
मौसम भी हो जाता हैं चंचल
 बागों में  बस उसकी ही महक
चारो ओर खवाबों की लहर ।

अभी अभी आँखों से
    गुजरा हैं एक ख्वाब ।
अभी अभी दिल को
   हुआ हैं उससे प्यार ।





Saturday, August 10, 2013

एक सवाल

एक सवाल ने  संभाला हैं  मुझे
कितना  सच्चा, कितना गहरा
दिल से  था   पूछा    तुमने -
छोटी छोटी बातों में रह जाओगे
सपनों कि मंजिल कब पाओगे ?

गिले   शिकवों से था जो   दिल भारी भारी
तोड़ चला हु  उनको  अब  मैं    बारी बारी ।
 दर्द भी दिए थे जिसने
गले मिल उनसे भी
बस चलता रहता हु अब
बस मंजिल   ही   हैं सब ।
                              अमर 


Friday, June 28, 2013

रात की बात

रात   की  बात  थी
बात की   रात   थी
जो  भी  कहो  तुम  
भूल न पायेंगे हम ।

प्यार  हैं  ,प्यार को नाम न दो तो किया
प्यार   तो   प्यार   ही   रहेगा       सदा ।

जमाना       से       डरते         हो
 ओ             मेरी               जाना
 प्यार लेकिन जिंदा रखना पिया

जमाना  न  देखेगा  दिल हमारा
दिल  में  रखना   तस्वीर  हमारी
याद   आएगी    उम्र   भर    मेरी   ।
*
पल    की  बात  थी
ख्वाब का हाथ   था
जो  भी  कहो  तुम  
भूल न पायेंगे हम ।


ख्वाब था , ख्वाब को नाम न दो तो किया
पल  वो   तो  जिन्दा   ही   रहेगा      सदा ।


बन्धनों     में       बंधी      हो
ओ          मेरी              जाना
यकीन    रखना लेकिन पिया
 बाँहों मेरी  खुली  रहेगी   सदा
ज़माने का डर ,मिट जाये जब
आ    जाना    बांहों   मैं    मेरी ।
 
रात   की  बात  थी
बात की   रात   थी
जो  भी  कहो  तुम
भूल न पायेंगे हम ।

Saturday, June 22, 2013

बिन मौसम कि बरसात



बिन मौसम कि बरसात
आ थामा तुमने हाथ ।
आँखों में था गुस्सा
बन बैठा हैं प्यार ।

ओ रबा ! बेसबर क्यों किया हैं इतना ।

बरसो  खेले हम आँख मिचोली -
आँखों से जितने दूर जाते थे तुम
दिल के उतने करीब आते थे तुम ।
ये गुस्सा , ये नखरा था इंतज़ार जताना ।

ओ रबा ! बेसबर क्यों किया हैं इतना ।


बिन मौसम कि बरसात
आ थामा तुमने हाथ ।
आँखों में था गुस्सा
बन बैठा हैं प्यार ।

ओ रबा ! बेसबर क्यों किया हैं इतना ।

आँखों का था आँखों से   मिलना बस  
बह जाउंगी अब -
संग तेरे जाने कितनी दूर ।
ज़माने का डर
संग तेरे जाउंगी अब भूल ।

ओ रबा ! बेसबर क्यों किया हैं इतना ।

बिन मौसम कि बरसात
आ थामा तुमने हाथ ।
आँखों में था गुस्सा
बन बैठा हैं प्यार ।

ओ रबा ! बेसबर क्यों किया हैं इतना ।