Saturday, March 28, 2015

?

मत कर बदनाम इतना की  नाम न होने लगे
उनकी जगह  तेरी नीयत  पे शक न होने लगे ।
                                                 - अमर 

Sunday, March 1, 2015


मिलता नहीं कोई यहाँ अपनी मज़हब का
दे दे ख़ुदा  थोड़ी  सी  जमी  घर बसाने को ।

हज़ारों    निगाहों    का    शिकार    हु    मैं
मेरी लहू में अपनी किस्मत देख बैठे हैं वे ।

जाने   कितने   रंगो  मैं  रंग रखा हैं मुझको
मालूम नहीं मगर उनको मैं तो बस बेरंग हु । 


Sunday, January 11, 2015

खुले आम क़त्ल



जिस  शाख पे बैठ खुले आम क़त्ल करते रहे
हज़ारों  जुबां  उन्हें  ही   बेगुनाह  बताते  रहे   ।
 
                           *******

पी लेने दे थोड़ा सा  काम ,थोड़ी सी ज्यादा
हर का हो बस इक  पैमाना ,  ज़रूरी  नहीं   ।


                 


 

Sunday, September 28, 2014


ऐ ज़िंदगी , मुड़ के देख ले एक बार जरा 
बरसों के गीले शिकवे पल में दूर हो जायेंगे !
        *****
फुरसत के ख्याल दिल में भरने लगी हें आहें 
पैबंद लग जा आँखों में , वक़्त थम जा तू जरा !
      *****

झूठी हँसी  होंठो  पे , कुतरे  हुए  शब्द  जुबां     पे 
यकीन मान , शुकून मिला खुद को देख आईने में !
    *****
आज शाम खोल रखा हैं घर के सारे दरवाजे 
बिन दस्तक आ जाना , पलटने हैं पुराने कई पन्ने !
****

Sunday, August 17, 2014

 जुल्फ गिरी ,  जुल्म हुआ
हाय राम जाने
किया किया हुआ

एक रोग आ लगा
लोगों ने कहा
इश्क़ हो गया


नींदे पुछे , कब आऊ
दिल बोले बस
उसका ख़्वाब लाओ
मत रख महरूम
अपने दीदार से
खुली आँखे ही
न सो जाऊ

जुल्फ गिरी , जुल्म हुआ
हाय राम जाने
 किया किया हुआ

Wednesday, December 25, 2013

स्वराज कहु या ताजपोशी
सवाल अभी बुझा  नहीं हैं -

पथ पे रोशनी आयी हैं
अँधेरा  मगर मरा नहीं हैं

कलयुग कि एक कहानी हैं
हजार व्यथाऐ  हर रोज पनपते हैं

व्यथाओ पे उम्मीद का दिया जलाये रखना
छोटा ही सही सच्चे कदम बढ़ाए चलना ।

                                           - अमर

Saturday, November 9, 2013

अभी अभी आँखों से

अभी अभी आँखों से
    गुजरा हैं एक ख्वाब ।
अभी अभी दिल को
   हुआ हैं उससे प्यार ।

 कितनी सुंदर हैं वो काया
 परीयों सी उसकी हैं माया
वाह ख़ुदा , किया खूब हैं उसे बनाया ।
 गुजरे वो सामने से
 खुली आँखों मैं न समाती हैं
बंद कर लू आँखें
वह ख्वाब बन जाती हैं ।

अभी अभी आँखों से
    गुजरा हैं एक ख्वाब ।
अभी अभी दिल को
   हुआ हैं उससे प्यार ।

पतों  की सरसराहट
बूँदो की   हलचल
वाह ख़ुदा ,  हवाओं का रुख भी गया हैं बदल ।

जिधर  से गुजरती हैं वह
मौसम भी हो जाता हैं चंचल
 बागों में  बस उसकी ही महक
चारो ओर खवाबों की लहर ।

अभी अभी आँखों से
    गुजरा हैं एक ख्वाब ।
अभी अभी दिल को
   हुआ हैं उससे प्यार ।