Saturday, January 19, 2013

वजूद


तेरे ख्वाबों में कई सुराख हो गए थे -
झाँक के देखा तो एक जिंदगी नज़र आई
जलती रही थी जो रिश्ते के अलाव पे बरसो से  ।

मेरे वजूद का बस्ता कमरे के एक कोने में पड़े थे
मैं जाने कब की खो गयी,
बस तुम ही तुम रह गए थे ।

तेरे सपनो के बादल ने दी थी
मुझको तिरागी कि पोशाक
पहन उसे समझोतों संग हो चली थी ।

बरसो बाद आज तेरी सपने टूटने लगे
मंजिल का भी ठिकाना न रहा
देख मेरी ओर लगायी तुमने उम्मीद कि आस ।

थमा हैं तेरा हाथ या दी अपनी  सांसो को नयी हवा
सवाल दिल पूछता रहेगा
पर जाने क्यों  बाहर कि धूप अच्छी लगी  ।
  - अमर 

Friday, December 21, 2012

कुछ बदलने को जी चाहा हैं


न बंदूक न बाजुओं में ताकत
पर लड़ने को जी  चाहा हैं
कुछ बदलने को जी  चाहा हैं ।

मालूम नहीं बचे होंगे उन आँखों में आंसू  अब
दिल रोता हैं लेकिन मेरा
हजारों रूहों कि चीख सुन सुन के ।

ख़ूनी नाख़ून से खरोचे हु वे जिस्म
जिंदा हो के भी मरते जाते हैं -
सिहर उठ रहे  हर सोच मेरी ।

बुझने न देंगे  मसाल अब
लड़ने को जी  चाहा हैं
कुछ बदलने को जी  चाहा हैं ।
               
                          -अमर 
 
 




Friday, December 14, 2012

मंजिल करीब हैं

मोड़ पे  ऐसे , हजारों राहें निकलती हैं जहाँ
छोड़ वे बोले     -   "मंजिल करीब हैं" ।

Saturday, December 8, 2012

मुलायम यादे


ख्वाबों में मैं सांसे लेता हु
ख्वाबों ने,  मुझको जिंदा रखा हैं।
मासूम सी तेरी -
मुलायम यादों ने , मुझको जिंदा रखा हैं।

हजारों शहरों में  लुटता  आया हु
तुम्हे ढूँढते  बदनाम होता आया हु
तेरे प्यार ने, मुझको  जिंदा रखा हैं।
मासूम सी तेरी -
मुलायम यादों ने , मुझको जिंदा रखा हैं।

मालूम नहीं  निभाई थी  वफाई
या कि थी तुमने मुहसे बेवफाई
सवालों और उमीदों ने , मुझको जिंदा रखा हैं।
मासूम सी तेरी -
मुलायम यादों ने , मुझको जिंदा रखा हैं।

                                - अमर 

Saturday, December 1, 2012


लौटा दो कुछ पुराने लम्हों को ,
गलती नहीं होगी अबकी
जोश नहीं  तजुर्बा  जो साथ हैं ।

Thursday, November 29, 2012


दिल रोया , चेहरा हंसा
तुम न समझ पाए मेरे दर्द को ।

Tuesday, November 27, 2012

प्यार


इंकार सहना  सीख , सीख करना इंतज़ार
वरना   न कर  पाओगे  कभी  तुम    प्यार ।

- अमर